
तिल्दा-नेवरा।
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की 2624वीं जयंती (जन्म कल्याणक महोत्सव) पूरे शहर में श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाई गई। “जियो और जीने दो” के संदेश के साथ आयोजित इस पर्व में जैन समाज सहित शहरवासियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म की नैतिक आधारशिला माने जाते हैं। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्यागकर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया और 42 वर्षों तक कठोर तपस्या कर 72 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया। उनके द्वारा बताए गए पांच प्रमुख सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं।
इस अवसर पर सुबह प्रभात फेरी निकाली गई, जिसके बाद भव्य शोभायात्रा मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर बजरंग चौक, गांधी चौक एवं परशुराम चौक होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में महिला एवं पुरुष एक समान वेशभूषा में, गाजे-बाजे और भक्ति संगीत के साथ शामिल हुए। जगह-जगह नागरिकों द्वारा शरबत व स्वागत की व्यवस्था की गई, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया।
महावीर स्वामी के विचारों को भी इस दौरान स्मरण किया गया, जिनमें आत्मसंयम, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश प्रमुख रहा। उन्होंने सिखाया कि हर जीव के प्रति दया रखें, क्योंकि घृणा अंततः विनाश का कारण बनती है।
शोभायात्रा में महेंद्र जैन, मंगल जैन, अशोक जैन, राकेश जैन, नरेंद्र जैन, मनोज जैन, सौरभ जैन, गौरव जैन, अमित जैन, शैलेश जैन, अनिल जैन, प्रफुल्ल जैन, नवीन जैन, सुरेंद्र जैन, अभिषेक जैन, मनीष जैन, रूपेश जैन, विवेक जैन, सारंग जैन, नीरज जैन, लक्ष्मीकांत जैन, राजेश जैन, प्राजेश जैन, अंकित जैन, अतुल जैन, दिनेश जैन सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए।
साथ ही, आचार्य विद्यासागर महाराज के सानिध्य में हुए प्रतिष्ठा महोत्सव की स्मृति में श्रद्धालुओं ने नवनिर्मित जिनालय में दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
जैन समाज द्वारा इस पावन अवसर पर शहरवासियों के लिए प्रसाद एवं भंडारे की विशेष व्यवस्था भी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।





