Explained: 78 विधायक और 33 सांसद, 2022 से 2026 के बीच दल-बदल का बना रिकॉर्ड, नागालैंड-बंगाल टॉप पर

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के बीच देश में 111 मौजूदा सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों का दामन थाम लिया है.
भारतीय राजनीति में नेताओं का एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों का पाला बदलना लोकतंत्र और जनता के जनादेश पर गंभीर सवाल खड़े करता है. निर्वाचन क्षेत्र के सुधारों और पारदर्शी लोकतंत्र के लिए काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ की हालिया संयुक्त रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है.
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के बीच देश में 111 मौजूदा सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों का दामन थाम लिया है. यह विश्लेषण इस अवधि के दौरान आयोजित हुए आम चुनावों, राज्य विधानसभा चुनावों और उप-चुनावों के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है.
किस सदन से कितने जनप्रतिनिधि?
रिपोर्ट के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दल-बदल की सबसे अधिक घटनाएं राज्यों की विधानसभाओं में देखी गईं. कुल 111 जनप्रतिनिधियों के दलबदल का सदन-वार विवरण इस प्रकार है
राज्य विधानसभाएं (MLAs): 78 विधायक
लोकसभा (MPs): 26 सांसद
राज्यसभा (MPs): 7 सांसद
एडीआर (ADR) की रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में सरकारों के गिरने और नई सरकारों के गठन के पीछे विधायकों द्वारा किया गया यह दल-बदल ही मुख्य कारण रहा. विधायकों के पाला बदलने से कई राज्यों का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया.
नागालैंड और पश्चिम बंगाल शीर्ष पर
यदि भौगोलिक दृष्टि से देखें तो पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में जनप्रतिनिधियों का पाला बदलने का चलन सबसे अधिक देखा गया. दल-बदल के मामले में नागालैंड शीर्ष स्थान पर रहा. राज्य के 32 सांसदों और विधायकों ने अपनी पार्टी बदली, जो कुल दल-बदल का 29% है. इस सूची में पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां 20 जनप्रतिनिधियों (कुल का 18%) ने चुनाव जीतने के बाद अपनी मूल पार्टी छोड़ी.
नुकसान में रहने वाले राजनीतिक दल
एडीआर रिपोर्ट के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दल-बदल का सबसे बड़ा झटका तीन प्रमुख राजनीतिक दलों को लगा. नेक्स्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP), ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) इन तीनों दलों ने मिलकर कुल 111 में से 64 (यानी 58%) जनप्रतिनिधि खो दिए.
सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि खोने वाले दलों की पूरी सूची
नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP): 25 जनप्रतिनिधि (23%)
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC): 20 जनप्रतिनिधि (18%)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 19 जनप्रतिनिधि (17%)
भारत राष्ट्र समिति (BRS): 9 जनप्रतिनिधि (8%)
आम आदमी पार्टी (AAP): 7 जनप्रतिनिधि (6%)
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP): 7 जनप्रतिनिधि (6%)
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – UBT): 6 जनप्रतिनिधि (5%)
जनता दल (यूनाइटेड – JDU): 5 जनप्रतिनिधि (5%)
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP): 4 जनप्रतिनिधि (4%)
लाभ में रहने वाले राजनीतिक दल
दूसरी तरफ, दल-बदल करने वाले अधिकतर नेताओं को अपने पाले में खींचने में मुख्य रूप से तीन राजनीतिक दल सफल रहे. नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने मिलकर दल-बदल करने वाले 111 में से 81 (यानी 73%) जनप्रतिनिधियों को अपनी पार्टी में शामिल किया.
सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि हासिल करने वाले दलों की सूची
नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF): 32 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (29%)
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 29 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (26%)
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI): 20 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (18%)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 9 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (8%)
शिवसेना: 8 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (7%)
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP): 6 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (5%)
पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल: 4 नए जनप्रतिनिधि शामिल हुए (4%)
राजनीतिक प्रभाव और दल-बदल विरोधी कानून पर सवाल
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद भारतीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया में नैतिक मूल्यों पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनाव जीतने के बाद किसी प्रतिनिधि द्वारा पाला बदलना उन मतदाताओं के भरोसे को तोड़ता है जिन्होंने किसी खास विचारधारा या दल के चुनाव चिह्न पर वोट दिया था.
हालांकि भारत में संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून लागू है, फिर भी कानूनी खामियों और सामूहिक विलय के प्रावधानों के चलते नेता आसानी से अपनी पार्टियां बदल लेते हैं.




