
तिल्दा-नेवरा (छत्तीसगढ़):
ग्राम पंचायत देवरी में फर्जी NOC कांड के बाद अब ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर गांव में माहौल गरमा गया है और ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन नियमों की अनदेखी कर सरपंच को बचाने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर SDM की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि पहले अलदा गांव के NOC विवाद में भी प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही थी और अब देवरी में भी वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है।
सुनवाई की तारीख पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव की सुनवाई नियमानुसार 15 दिनों के भीतर होनी चाहिए थी, लेकिन 16वें दिन यानी 16 अप्रैल की तारीख तय की गई है। ग्रामीण इसे सरपंच को कोर्ट से स्टे लेने का मौका देने के रूप में देख रहे हैं।
ग्राम सभा में सुनवाई की मांग
देवरी के पंचों और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने साफ मांग रखी है कि अविश्वास प्रस्ताव की सुनवाई जनपद कार्यालय के बंद कमरों में नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत में खुले तौर पर की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे:
निर्णय निष्पक्ष होगा और किसी प्रकार का दबाव नहीं रहेगा
पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी
गांव की जनता के सामने लोकतांत्रिक तरीके से फैसला लिया जा सकेगा
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 16 अप्रैल की सुनवाई में किसी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। गांव के लोग एकजुट होकर इस मुद्दे पर डटे हुए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
नेताओं की प्रतिक्रिया
जनपद सभापति देवव्रत शर्मा ने कहा कि प्रशासन को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता सब देख रही है। यदि देवरी के साथ न्याय नहीं हुआ तो इसका विरोध और तेज होगा।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें 16 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां यह तय होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों को कितना महत्व देता है।





