
तिल्दा-नेवरा |
तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत अल्दा में 6 अप्रैल को हालात पूरी तरह गरमा गए। फॉरेंसिक रिपोर्ट की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और तहसील कार्यालय व संबंधित कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। रात 10 बजे तक SDM की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन अब तक तीन बार किया जा चुका है, लेकिन हर बार प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन मिला, ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से लोग बार-बार आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।
गंभीर आरोपों से गरमाया माहौल
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ग्राम सभा रजिस्टर में छेड़छाड़ की गई है और फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए हैं। वहीं, जांच पूरी होने के बावजूद फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने नहीं लाई जा रही है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
लाठीचार्ज का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। लोगों ने सवाल उठाया कि पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है या दोषियों को बचाने के लिए।
कार्यालय का घेराव, स्थिति हुई गंभीर
स्थिति उस वक्त और तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में ग्रामीण संबंधित कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए। इसे प्रशासन के लिए अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
‘न्याय दो या आंदोलन झेलो’
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन धरना, भूख हड़ताल जैसे बड़े कदम उठाए जाएंगे।
कंपनी के खिलाफ खुला विरोध
ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे गांव में किसी भी कंपनी को स्थापित नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि जब तक पूरा मामला स्पष्ट नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन समय रहते कार्रवाई करेगा या यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा?





