वॉशिंगटन। Trump Tariff Waiver: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर नए अमेरिकी टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत निर्धारित कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। इससे भारत और चीन जैसे रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों को राहत मिली है।
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने इस फैसले के लिए अमेरिका के राष्ट्रीय हित का हवाला दिया। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब नए कानून के तहत कुछ अहम प्रावधान लागू होने वाले थे। हालांकि, इस आदेश की छूट का दायरा ग्राहम एक्ट के संबंधित प्रावधानों तक है।
किन पांच देशों से जुड़ा था टैरिफ का खतरा?
रूसी तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख खरीदारों के खिलाफ कार्रवाई इस कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर द्वारा कानून के समर्थन में जारी जानकारी में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का उल्लेख किया गया था।
इन देशों की रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी संसद में आर्थिक दबाव बनाने की मांग उठ रही थी। कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली आय पर दबाव डालना और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उसके खिलाफ आर्थिक कार्रवाई का दायरा बढ़ाना था। अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने संबंधित विधेयक को 86 के मुकाबले 11 मतों से पारित किया था।
अमेरिका में आने वाले सामान पर लग सकता था अतिरिक्त शुल्क
कार्यकारी आदेश में रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान बताया गया है। इसमें 18 अक्टूबर 2026 या उसके बाद रूस से नई खरीद की स्थिति का उल्लेख है।
इसका संबंध संबंधित देशों के सामान पर अमेरिका में लगने वाले आयात शुल्क से है। इसलिए भारत के लिए यह मामला ऊर्जा खरीद के साथ अमेरिकी बाजार में उसके निर्यात से भी जुड़ा है। अब ट्रंप ने संबंधित नए शुल्कों को लागू करने से छूट दी है।
राष्ट्रीय हित के आधार पर लिया गया फैसला
ट्रंप ने कानून में राष्ट्रपति को दी गई छूट देने की शक्ति का इस्तेमाल किया है। ग्राहम एक्ट की धारा 115 के तहत राष्ट्रीय हित के आधार पर निर्धारित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का प्रावधान है। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस को लिखित प्रमाणन और उसके आधार की जानकारी देनी होती है।
आदेश में ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने कांग्रेस को आवश्यक प्रमाणन भेज दिया है। इसमें इस समय छूट जारी करने को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया गया है। कानून लागू करने की व्यवस्था के भीतर ही यह राहत दी गई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह राहत?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर कच्चे तेल का आयात करता है और रूस उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। रूसी ऊर्जा खरीद से जुड़े नए दंडात्मक शुल्क लागू होने की संभावना भारतीय व्यापार और ऊर्जा नीति के लिए महत्वपूर्ण विषय बनी हुई थी।
इस फैसले का भारत के लिए व्यावहारिक महत्व यह है कि ग्राहम एक्ट के तहत संभावित नए शुल्कों का तत्काल दबाव कम हुआ है। इससे रूसी तेल की खरीद और अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात से जुड़ी एक प्रमुख अनिश्चितता फिलहाल घटी है।
राहत का असर समझते समय ऊर्जा आयात और वस्तुओं के निर्यात, दोनों पहलुओं को देखना जरूरी है। संभावित अतिरिक्त शुल्क भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार की लागत और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा मुद्दा बन सकता था।
पुराने प्रतिबंधों और अन्य शुल्कों की स्थिति भी समझें
नए आदेश में पहले से लागू कुछ अमेरिकी कार्यकारी आदेशों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को अप्रभावित रखने की बात स्पष्ट की गई है। इसलिए इस घोषणा को रूस से जुड़े सभी पुराने प्रतिबंध समाप्त होने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
इसी तरह भारत और अमेरिका के बीच प्रत्येक वस्तु पर लागू सभी व्यापार शुल्क खत्म होने की घोषणा भी इस आदेश का हिस्सा नहीं है। किसी विशेष सामान या लेनदेन पर लागू नियम उसकी श्रेणी और संबंधित अमेरिकी प्रावधानों के अनुसार देखे जाएंगे।
कब तक प्रभावी रहेगी छूट?
आदेश के मुताबिक, यह छूट तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या संबंधित अधिकृत अमेरिकी अधिकारी आगे कार्रवाई आवश्यक नहीं समझते। साथ ही रूसी ऊर्जा खरीद और प्रतिबंधों से बचने में सहायता जैसी गतिविधियों की निगरानी जारी रहेगी। इसलिए आगे की अमेरिकी समीक्षा और निर्णय इस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
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