वृन्दावन में “शताब्दी आनन्द महोत्सव” का शुभारंभ, संत-स्मृति से गूंजा श्री वामदेव ज्योतिर्मठ

वृन्दावन। परम पावन ब्रज वसुन्धरा वृन्दावन स्थित श्री वामदेव ज्योतिर्मठ में ब्रह्मलीन पूज्यपाद श्री स्वामी वामदेव जी महाराज की दिव्य स्मृतियों को समर्पित “शताब्दी आनन्द महोत्सव” का प्रथम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल स्मृति-समारोह नहीं, बल्कि संत-परम्परा की अखण्ड ज्योति के पुनर्प्रज्वलन का दिव्य अवसर सिद्ध हुआ।
महोत्सव में श्री मज्जगदगुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। उनके आगमन पर वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्पवर्षा और संत-वंदना से सम्पूर्ण परिसर गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं के हृदयों में भक्ति और संत-स्मृति का स्पंदन स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया।

इस अवसर पर ब्रह्मलीन पूज्यपाद श्री स्वामी वामदेव जी महाराज के तप, त्याग और साधना-समन्वित जीवन का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें युगों के आलोक-स्तंभ के रूप में नमन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे संत केवल किसी मठ या परम्परा तक सीमित नहीं होते, बल्कि सम्पूर्ण समाज के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक होते हैं।

यह भव्य आयोजन परम पूज्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अनन्तदेव जी महाराज के कुशल निर्देशन में सम्पन्न हुआ। देशभर से पधारे संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को भक्तिमय और प्रेरणादायी बना दिया। भजन, प्रवचन और श्रद्धांजलि सभाओं के माध्यम से संत-परम्परा की गौरवशाली धारा का पुनः अवगाहन हुआ।

विशिष्ट संत-महात्माओं की उपस्थिति
महोत्सव में श्री महानिर्वाणी अखाड़ा के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती जी, परमार्थ निकेतन के प्रमुख स्वामी चिदानन्द मुनि जी महाराज सहित अनेक पीठाधीश्वर, महामण्डलेश्वर एवं संत-समाज के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वास्तव में “शताब्दी आनन्द महोत्सव” वृन्दावन की आध्यात्मिक भूमि पर संत-स्मृति, भक्ति और चेतना का अद्वितीय संगम सिद्ध हुआ। यह आयोजन केवल अतीत का गौरवगान नहीं, बल्कि वर्तमान का आलोक और भविष्य का पथ-निर्देशन भी है।




