
आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ गंगा सप्तमी यानी गंगा जयंती मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह पावन पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण या पुनर्जन्म के रूप में विशेष महत्व रखता है।
इस वर्ष गंगा सप्तमी पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। गुरु पुष्य योग और अमृत सिद्धि योग के एक साथ होने से पूजा, स्नान और दान का महत्व कई गुना बढ़ गया है। मान्यता है कि इस शुभ दिन पर गंगा स्नान करने या घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त:
मध्याह्न पूजा: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सुबह 5:48 बजे से 7:26 बजे तक
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्रद्धालु इस दिन मां गंगा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं, आरती उतारते हैं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करते हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, इसी दिन गंगा नदी ऋषि जह्नु के कान से प्रकट हुई थीं, इसलिए मां गंगा को ‘जाह्नवी’ भी कहा जाता है।
देश के विभिन्न गंगा घाटों पर आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है। हर कोई मां गंगा की आराधना कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि और पवित्रता की कामना कर रहा है।
खास बात:
गंगा सप्तमी का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है।





