‘ना डांस कर सकता है, ना एक्टिंग…’ कहकर किया था रिजेक्ट, आज 400+ फिल्मों के मेगास्टार हैं ममूटी
शुरुआत में नहीं मिली बड़ी पहचान
Mammootty Success Story: फिल्मी दुनिया में हर कलाकार का सफर आसान नहीं होता। कई सितारों को पहचान मिलने से पहले रिजेक्शन और संघर्ष का सामना करना पड़ता है। मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी उन्हें यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि वह न तो डांस कर सकते हैं और न ही एक्टिंग। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने दमदार अभिनय के दम पर ऐसी पहचान बनाई कि आज वह भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में गिने जाते हैं।
ममूटी ने पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम किया है। मलयालम सिनेमा के अलावा उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जलवा दिखाया है।
वकालत से फिल्मों तक पहुंचा सफर
ममूटी का असली नाम मुहम्मद कुट्टी पनापरम्बिल इस्माइल है। उनका जन्म 7 सितंबर 1951 को केरल में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एर्नाकुलम के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की और वकालत का पेशा भी अपनाया।
हालांकि, अभिनय की दुनिया उन्हें शुरू से ही आकर्षित करती थी। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। साल 1971 में फिल्म ‘अनुभवंगल पालिचाकल’ में उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर कैमरे का सामना किया। शुरुआती भूमिकाएं छोटी थीं, लेकिन यहीं से उनका फिल्मों के प्रति लगाव और बढ़ता गया।
शुरुआत में नहीं मिली बड़ी पहचान
फिल्मों में शुरुआती दौर ममूटी के लिए आसान नहीं रहा। उन्हें छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करनी पड़ी। इसी दौरान उनके बारे में यह किस्सा भी सामने आता है कि एक निर्देशक ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्हें यह तक कह दिया था कि वह न डांस कर सकते हैं और न ही एक्टिंग।
ऐसे शब्द किसी भी नए कलाकार का हौसला तोड़ सकते थे, लेकिन ममूटी ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने लगातार काम किया और अपनी अदाकारी को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
1980 के दशक में बदली तस्वीर
साल 1980 ममूटी के करियर में अहम मोड़ लेकर आया। ‘विल्क्कनुंडु स्वप्नंगल’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्हें पहचान मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्होंने उन्हें मलयालम सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया।
‘अहिंसा’, ‘संध्याक्कु विरिंजा पूवु’, ‘यात्रा’, ‘निराकूट्टू’, ‘न्यू दिल्ली’ समेत कई फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी।
इसके बाद ममूटी ने सिर्फ व्यावसायिक फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने चुनौतीपूर्ण और गंभीर किरदारों को भी चुना। ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’, ‘मथिलुकल’, ‘विदेयन’ और ‘पोंथन माडा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
डॉ. अंबेडकर का किरदार भी निभाया
ममूटी के करियर के यादगार किरदारों में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का रोल भी शामिल है। इस भूमिका में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के व्यक्तित्व और संघर्ष को पर्दे पर उतारने की कोशिश की, जिसे उनके बेहतरीन प्रदर्शनों में गिना जाता है।
उनकी खासियत यही रही कि वह हर किरदार में खुद को ढालने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनकी फिल्मों और अभिनय को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
400 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
ममूटी ने अपने लंबे करियर में 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। क्षेत्रीय सिनेमा तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया।
अलग-अलग भाषाओं और अलग तरह के किरदारों में खुद को ढालने की उनकी क्षमता ने उन्हें सिर्फ मलयालम सिनेमा का नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया।
तीन बार जीत चुके हैं नेशनल अवॉर्ड
ममूटी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें कई केरल राज्य फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड भी मिले हैं।
सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1998 में पद्म श्री से सम्मानित किया था।
75 की उम्र में भी जारी है फिल्मों का सफर
उम्र के 75वें पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद ममूटी का फिल्मों के प्रति जुनून कम नहीं हुआ है। वह आज भी अलग-अलग तरह की कहानियों और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं का हिस्सा बन रहे हैं।
जिस कलाकार को कभी यह सुनना पड़ा था कि ‘ना डांस कर सकता है, ना एक्टिंग’, उसी ममूटी ने अपने लंबे करियर में अभिनय के दम पर ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज मलयालम सिनेमा के इतिहास के सबसे बड़े अध्यायों में गिना जाता है।




