तिल्दा-नेवरा बनता जा रहा ‘डस्ट ज़ोन’, आरंग–खरोरा–सिमगा से भी बदतर हालात

छत्तीसगढ़ का तिल्दा-नेवरा क्षेत्र अब गंभीर डस्ट प्रदूषण की चपेट में आता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरंग, खरोरा और सिमगा जैसे औद्योगिक व परिवहन प्रभावित इलाकों से भी तिल्दा-नेवरा में धूल का स्तर कहीं अधिक बढ़ चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
सड़कों पर उड़ती धूल, सांस लेना हुआ मुश्किल
मुख्य सड़कों से लेकर कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों तक दिनभर धूल के गुबार छाए रहते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही, अधूरी सड़कों, औद्योगिक गतिविधियों और नियमित पानी छिड़काव व सफाई के अभाव ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा सीधा असर
स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार क्षेत्र में
दमा, एलर्जी और सांस की बीमारियां
आंखों में जलन, खांसी और त्वचा रोग
के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
प्रशासनिक अनदेखी का आरोप
नागरिकों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण और सड़क रखरखाव को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। न तो पर्याप्त पानी का छिड़काव हो रहा है और न ही निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अपनाए जा रहे हैं। ट्रकों को ढंककर चलाने और गति सीमा के नियमों का भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।




