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CRIME NEWS: ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ में 16 राज्यों में रेड, 104 साइबर ठग गिरफ्तार

127 करोड़ की ठगी से जुड़े 1055 मामलों का खुलासा, बैंक अधिकारी की मिलीभगत भी सामने आई

हैदराबाद। CRIME NEWS: देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध पर बड़ी चोट करते हुए हैदराबाद सिटी पुलिस ने ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ के तहत 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी कर 104 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इसे किसी एक राज्य की पुलिस द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। 10 दिनों तक चले इस विशेष अभियान में 127 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े 1055 मामलों का खुलासा हुआ है।

इस ऑपरेशन के लिए 32 स्पेशल टीमें गठित की गईं, जिनका नेतृत्व इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों ने किया। टीमों को महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और ओडिशा सहित 16 राज्यों में तैनात किया गया। स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय कर साइबर क्राइम हॉटस्पॉट्स पर सटीक इनपुट के आधार पर एक साथ छापेमारी की गई।

जांच में निवेश घोटाले, ट्रेडिंग फ्रॉड और तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों का बड़ा नेटवर्क सामने आया। ठग लोगों को डराकर या लालच देकर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करवाते थे। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, हैदराबाद ने फॉरेंसिक विश्लेषण के जरिए 151 बैंक खातों की पहचान की, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खाते खुलवाए गए थे और रकम को लेयरिंग कर मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था।

गिरफ्तार 104 आरोपियों में 86 म्यूल अकाउंट होल्डर, 17 अकाउंट सप्लायर/एग्रीगेटर और एक बैंक अधिकारी शामिल है। बैंक अधिकारी पर आरोप है कि उसने फर्जी खातों के संचालन में मदद की। पुलिस के अनुसार 1055 मामलों में अब तक 127 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है और जांच आगे बढ़ने पर आंकड़ा बढ़ सकता है।

छापेमारी के दौरान 204 मोबाइल फोन, 141 सिम कार्ड, 152 बैंक पासबुक, 234 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 26 लैपटॉप, 56 फर्मों की मुहरें और 36 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। जब्त डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।

पूरे अभियान की निगरानी संयुक्त पुलिस आयुक्त (स्पेशल ब्रांच) एस.एम. विजय कुमार और डीसीपी (साइबर क्राइम) वी. अरविंद बाबू ने की। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई है और ऑपरेशन अभी जारी है। सिंडिकेट के शीर्ष स्तर तक पहुंचकर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी रहेगी।

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