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नई दिल्ली NCR NEWS: दिल्ली-एनसीआर में दौड़ेगी एयर टैक्सी? CII ने पेश किया 75 KM एयर कॉरिडोर का प्रस्ताव

मिनटों में तय होगा घंटों का सफर, गुरुग्राम से नोएडा एयरपोर्ट तक हवा में कनेक्टिविटी की तैयारी

नई दिल्ली NCR NEWS: दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक समस्या से राहत दिलाने के लिए कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला एयर टैक्सी कॉरिडोर विकसित किया जा सकता है। अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो लोग सड़कों के जाम से बचकर हवा में सफर कर सकेंगे और घंटों का रास्ता मिनटों में पूरा होगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-3 और साइबर हब से शुरू होकर दिल्ली एयरपोर्ट, कनॉट प्लेस और नोएडा सेक्टर-18 होते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक जाएगा। इस एयर रूट की लंबाई करीब 65 से 75 किलोमीटर बताई जा रही है। जहां अभी सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम पहुंचने में ट्रैफिक के कारण 1 से 2 घंटे लग जाते हैं, वहीं एयर टैक्सी के जरिए यह दूरी 12 मिनट से भी कम समय में तय की जा सकेगी। इसी तरह कनॉट प्लेस से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक का सफर महज 18 से 20 मिनट में पूरा होने का अनुमान है।

एयर टैक्सी दरअसल एक छोटा, हल्का और इलेक्ट्रिक विमान होता है, जो वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) तकनीक पर आधारित होता है। इसे पारंपरिक रनवे की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह सीधे ऊपर उड़ान भर सकता है और सीधे नीचे उतर सकता है। इसमें एक बार में 2 से 6 यात्री सफर कर सकते हैं। चूंकि यह बैटरी से संचालित होता है, इसलिए इससे धुआं या प्रदूषण नहीं होता और शोर भी अपेक्षाकृत कम होता है।

इस परियोजना के तहत शहर में विशेष लैंडिंग पॉइंट बनाए जाएंगे, जिन्हें ‘वर्टीपोर्ट’ कहा जाएगा। ये वर्टीपोर्ट बड़े मॉल, होटल, अस्पताल या ऑफिस बिल्डिंग की छतों पर विकसित किए जा सकते हैं, जिससे अलग से जमीन अधिग्रहण की जरूरत कम होगी।

किराए को लेकर शुरुआती अनुमान है कि दिल्ली से गुरुग्राम के बीच एकतरफा सफर का किराया 2000 से 3000 रुपये के बीच हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के सस्ती होने और सेवाओं के विस्तार के साथ भविष्य में किराया कम भी हो सकता है।

फिलहाल इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। दिल्ली में कड़े सुरक्षा नियम, नो-फ्लाइ जोन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अनुमति और मौसम संबंधी बाधाएं, खासकर सर्दियों का कोहरा, बड़ी अड़चन बन सकते हैं। इसके बावजूद अगर यह मॉडल सफल होता है तो आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर की शहरी परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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