अयोध्या के आसमान में दिखेगी रामायण, इस दिन 2,100 स्वदेशी ड्रोन पेश करेंगे अद्भुत नजारा
दीपोत्सव के 10वें संस्करण में लाखों दीयों से जगमगाएगी रामनगरी, सरयू आरती में शामिल होंगे 2,147 प्रतिभागी; देश-विदेश के कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
अयोध्या। Ayodhya Deepotsav 2026: रामनगरी अयोध्या में इस बार दीपोत्सव आस्था, संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम के रूप में मनाने की तैयारी है। आगामी 7 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले दीपोत्सव के 10वें संस्करण में 2,100 स्वदेशी ड्रोन रामायण पर आधारित आकाशीय शो प्रस्तुत करेंगे। सरयू तट पर सामूहिक आरती, लाखों मिट्टी के दीयों की रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे।
समारोह को भव्य स्वरूप देने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि राम की पैड़ी सहित पूरी अयोध्या को दीपों से रोशन किया जाए। उन्होंने आयोजन की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।
आसमान में रामायण की झलक दिखाएंगे स्वदेशी ड्रोन
दीपोत्सव में होने वाला ड्रोन शो विशेष आकर्षण रहेगा। स्वदेशी तकनीक से तैयार 2,100 ड्रोन के माध्यम से रामायण की थीम पर आकाशीय प्रस्तुति दी जाएगी। इस आयोजन में पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ आधुनिक दृश्य तकनीक का उपयोग भी देखने को मिलेगा।
राम की पैड़ी पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा लेजर डिस्प्ले और अंतरराष्ट्रीय रामलीलाओं का मंचन प्रस्तावित है। गोंडा पुल के पास हरित आतिशबाजी भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी। इस तरह श्रद्धालुओं को दीपोत्सव में अलग-अलग तरह की प्रस्तुतियां देखने का अवसर मिलेगा।
तीन चरणों में होगा दीपोत्सव का आयोजन
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से तैयार रूपरेखा के अनुसार, मुख्य समारोह तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। इसमें शोभायात्रा से लेकर भगवान राम के प्रतीकात्मक आगमन, राज्याभिषेक और सरयू तट पर दीप प्रज्ज्वलन तक के कार्यक्रम शामिल होंगे।
पहला चरण—रामायण के प्रसंगों के साथ निकलेगी शोभायात्रा
समारोह की शुरुआत साकेत महाविद्यालय से निकलने वाली भव्य शोभायात्रा से होगी। इसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित झांकियां शामिल की जाएंगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान राम के जीवन के आदर्शों और रामकथा के संदेशों को दर्शाया जाएगा।
झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिए श्रद्धालुओं को रामायण के प्रसंगों से जोड़ने की तैयारी है। शोभायात्रा दीपोत्सव के मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत का प्रमुख हिस्सा होगी।
दूसरा चरण—रामकथा पार्क में भरत मिलाप और राज्याभिषेक
दूसरे चरण के कार्यक्रम रामकथा पार्क में आयोजित होंगे। यहां भगवान राम और माता सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकारों का प्रतीकात्मक आगमन होगा। इसके बाद भरत मिलाप का मंचन किया जाएगा।
इसी क्रम में भगवान राम के राज्याभिषेक का समारोह भी आयोजित होगा। रामकथा से जुड़े इन प्रसंगों के माध्यम से अयोध्या आगमन और स्वागत के उल्लास को प्रस्तुत किया जाएगा।
तीसरा चरण—सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन और आकाशीय शो
तीसरे चरण में राम की पैड़ी और सरयू तट पर मुख्य आयोजन होंगे। इनमें सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, 200 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ड्रोन शो और लेजर प्रस्तुति शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय रामलीलाओं के मंचन और हरित आतिशबाजी की भी तैयारी है।
सरयू आरती में शामिल होंगे 2,147 प्रतिभागी
दीपोत्सव के दौरान सरयू आरती को विशेष स्वरूप दिया जाएगा। सामूहिक आरती में 2,147 प्रतिभागियों के शामिल होने की योजना है। इसके साथ राम की पैड़ी सहित अयोध्या के विभिन्न हिस्सों को लाखों मिट्टी के दीयों से रोशन किया जाएगा।
प्रशासन की तैयारी है कि आयोजन का उत्साह मुख्य कार्यक्रम स्थल के साथ पूरी रामनगरी में दिखाई दे। दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
13 राज्यों के लगभग एक हजार कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
दीपोत्सव में देश की विविध लोककलाओं और नृत्य परंपराओं की झलक भी दिखाई देगी। आयोजन में 13 राज्यों के लगभग 1,000 कलाकारों की भागीदारी होगी। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के कलाकार शामिल हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों की प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता सामने आएगी। रामायण आधारित कार्यक्रमों के साथ लोककलाओं को भी आयोजन में स्थान दिया गया है।
इसके अलावा 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। भारत में पदस्थ विदेशी राजदूतों और विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की रहेगी भागीदारी
इतने बड़े आयोजन में करीब 35,000 स्वयंसेवकों के शामिल होने की तैयारी है। दीपोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण रहेगी।
मुख्यमंत्री ने तैयारियों को अंतिम रूप देते समय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय रखने के निर्देश भी दिए हैं। स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया है।
डिजिटल माध्यमों से पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य
दीपोत्सव का अनुभव आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों के साथ डिजिटल दर्शकों तक पहुंचाने की भी योजना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समारोह को पांच करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य आयोजन की पहुंच बढ़ाने के लिए तय किया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव अब वैश्विक पहचान हासिल कर चुका है। इस बार 10वें संस्करण में भारतीय संस्कृति, परंपरा और जनआस्था को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा, स्वच्छता और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान
तैयारियों की समीक्षा में श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा के साथ साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर है।
अधिकारियों से कहा गया है कि आयोजन स्थलों पर पर्याप्त संकेतक और मार्गदर्शन की व्यवस्था हो, ताकि श्रद्धालुओं को पहुंचने और कार्यक्रमों में शामिल होने में परेशानी न हो। सभी व्यवस्थाओं में धार्मिक गरिमा बनाए रखने और विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।




