रायपुर में एक मेहनतकश पेंटर के साथ कथित तौर पर मजदूरी का भुगतान न करने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने श्रमिकों के शोषण और उनके अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित Dheeraj Sharma के अनुसार उसने 1 जनवरी से 7 अप्रैल के बीच Ripudaman Singh Pusri के घर में लगातार पेंटिंग का काम किया। इस दौरान उसने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम पूरा किया, लेकिन जब मेहनताना लेने की बारी आई तो उसे बार-बार टाल दिया गया।
पीड़ित का कहना है कि पहले उसे 30 मार्च को आने के लिए कहा गया, फिर उस दिन पहुंचने पर एक और कमरे की सीलिंग का काम करने को कहा गया और 7 अप्रैल को एक साथ भुगतान देने का आश्वासन दिया गया। लेकिन जब वह तय तारीख पर पैसे लेने पहुंचा, तो उसे गाली-गलौज करते हुए पैसे देने से साफ इनकार कर दिया गया और कहा गया कि “जो करना है कर लो, एक रुपया नहीं मिलेगा।”
इस घटना के बाद पीड़ित खुद को ठगा हुआ और मानसिक रूप से परेशान महसूस कर रहा है। उसने बताया कि वह केवल अपने किए गए काम का मेहनताना चाहता है, लेकिन उसे अपमान और निराशा ही हाथ लगी।
अब इस मामले में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या शासन और पुलिस प्रशासन ऐसे पीड़ित श्रमिक को न्याय दिला पाएंगे? क्या बिना थाना-कचहरी के ही एक मेहनतकश व्यक्ति को उसका हक मिल पाएगा, या फिर उसे लंबी कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ेगा? यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था और श्रमिकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।
पीड़ित Dheeraj Sharma का कहना है कि वह किसी विवाद में पड़ना नहीं चाहता, इसलिए उसने इस मामले को मीडिया के माध्यम से सामने रखा है, ताकि उसे बिना किसी झंझट के उसका भुगतान मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि इस खबर के बाद भी उन्हें उनका मेहनताना नहीं मिलता है, तो वे मजबूर होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।