
कवर्धा।
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में धान खरीदी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान जिले के दो धान खरीदी केंद्रों से करीब 26 हजार क्विंटल धान गायब होने का आरोप लगा है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ रुपए बताई जा रही है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सीधा घोटाला करार देते हुए जिला प्रशासन और विपणन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दो खरीदी केंद्रों में गंभीर अनियमितताएं
जांच के दौरान बाजार चारभांठा और बघर्रा धान खरीदी केंद्रों में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि—
फर्जी एंट्री और बिल तैयार किए गए
मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई गई
सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई
शिकायत सही पाए जाने पर बाजार चारभांठा केंद्र के प्रभारी प्रीतेश पांडे को पद से हटा दिया गया है।
‘चूहा-दीमक’ की दलील पर सियासी घमासान
जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा का कहना है कि जो धान उपलब्ध नहीं है, वह चूहों, दीमक, कीड़ों और मौसम की मार से खराब हो सकता है।

हालांकि कांग्रेस ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए इसे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताया है।
DMO के अनुसार बघर्रा धान खरीदी केंद्र की जांच अभी जारी है और रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
DMO कार्यालय में कांग्रेस का प्रदर्शन
बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी DMO कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से चूहा पकड़ने का पिंजरा विपणन संघ अधिकारी को सौंपा। साथ ही ज्ञापन देकर—

निष्पक्ष जांच
दोषियों पर सख्त कार्रवाई
घोटाले की राशि की वसूली की मांग की गई।
भाजपा पर संरक्षण देने का आरोप
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि 7 करोड़ रुपए का धान गायब होना अपने आप में बड़े घोटाले का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी ने कहा कि “इतना धान चूहे नहीं खा सकते, यह तर्क हास्यापद है।”
उन्होंने SIT जांच, दोषियों पर एफआईआर और राशि वसूली की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।




