पुलवामा हमला: जिसने देश को रुला दिया
14 फरवरी 2019 की दोपहर, जम्मू से श्रीनगर जा रहे CRPF के काफिले पर पुलवामा जिले के अवंतीपोरा क्षेत्र में आत्मघाती हमला हुआ। विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी जवानों की बस से टकराई और एक भीषण धमाका हुआ। कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। 40 जवान शहीद हो गए, कई घायल हुए और पूरा देश शोक में डूब गया।

टीवी स्क्रीन पर दिखती तस्वीरें, टूटे वाहनों के मलबे और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर—इन दृश्यों ने हर भारतीय को भीतर तक हिला दिया। गांव-गांव और शहर-शहर में शहीदों को अंतिम विदाई दी गई। लाखों आंखें नम थीं, लेकिन हर दिल गर्व से भरा था।
क्यों मनाया जाता है ‘ब्लैक डे’?
14 फरवरी को भारत में ‘ब्लैक डे’ इसलिए मनाया जाता है ताकि देश उन शहीदों की कुर्बानी को कभी न भूले। यह दिन शोक का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और राष्ट्रीय संकल्प का भी प्रतीक है।

लोग अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर काली तस्वीरें, शहीदों के फोटो, तिरंगे की छवियां और देशभक्ति संदेश साझा करते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी जाती है।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की लहर
ब्लैक डे पर हजारों लोग अपने व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक स्टेटस पर भावनात्मक कोट्स और इमेज लगाते हैं। कुछ पंक्तियां जो हर दिल को छू जाती हैं—
“पुलवामा का दर्द आज भी आंखें नम कर देता है,
हर दिल में देशभक्ति का जज़्बा भर देता है।”
“काला दिन है आज सही,
पर शहीदों की शहादत उजली है।”
“ना भूलेंगे, ना माफ़ करेंगे,
वीरों का बलिदान याद रखेंगे।”
“जब-जब तिरंगा लहराएगा,
हर शहीद का नाम गूंज जाएगा।”
“देश के लिए जो कुर्बान हुए,
वे इतिहास नहीं, अमर प्रेरणा बने।”
इन शब्दों में सिर्फ भावनाएं नहीं, बल्कि पूरे देश का सामूहिक सम्मान झलकता है।
शहीदों की विरासत
पुलवामा के शहीद देश के अलग-अलग राज्यों से थे—उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक। वे किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे भारत के बेटे थे। उनकी शहादत ने देश को एकजुट कर दिया।

उनकी कुर्बानी के बाद देश ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के फैसलों ने यह संदेश दिया कि भारत अपने वीरों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगा।
परिवारों का दर्द, देश का गर्व
शहीदों के परिवारों के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। एक पिता ने अपना बेटा खोया, एक पत्नी ने अपना जीवनसाथी और बच्चों ने अपने पिता। लेकिन इन परिवारों ने भी साहस और देशभक्ति का उदाहरण पेश किया।
कई परिवारों ने कहा—“हमें अपने बेटे पर गर्व है।” यह शब्द सुनकर पूरा देश भावुक हो उठा।

ब्लैक डे पर क्या कर सकते हैं आप?
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शहीदों की तस्वीर और श्रद्धांजलि संदेश साझा करें।
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दो मिनट का मौन रखकर वीरों को नमन करें।
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बच्चों और युवाओं को पुलवामा हमले की जानकारी दें।
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तिरंगे के साथ फोटो पोस्ट कर राष्ट्रीय एकता का संदेश दें।
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शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।
कुछ और प्रेरक देशभक्ति संदेश
“आँसू बहते हैं इस याद में,
पर हौसले टूटते नहीं फरियाद में।”
“वीरों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी,
भारत की मिट्टी सदा ऋणी रहेगी।”
“काला दिन हमें याद दिलाता है,
देश सबसे पहले—हर बात में।”
“शहादत अमर है,
तिरंगा गवाह है।”
“जो देश के लिए जिए और मरे,
वे हर दिल में सदा जिंदा रहेंगे।”
एक राष्ट्रीय संकल्प
ब्लैक डे हमें यह भी सिखाता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमें एकजुट रहना होगा। यह सिर्फ सरकार या सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह देश की एकता और अखंडता के लिए खड़ा रहे।
पुलवामा का दर्द आज भी ताजा है, लेकिन उसी के साथ है एक अटूट संकल्प—देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए हर हाल में साथ खड़े रहने का।
14 फरवरी को जब भी आप तिरंगा देखें, तो उन 40 वीरों को याद करें, जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तक देश की रक्षा की।
शहीदों को शत-शत नमन।
भारत हमेशा आपके बलिदान का ऋणी रहेगा।