अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए कहा है कि उन्हें एकतरफा टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैक्स लगाकर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया।
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को नेशनल इमरजेंसी के दौरान कॉमर्स को रेगुलेट करने की इजाजत देता है, लेकिन इसमें टैरिफ लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है। कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है और राष्ट्रपति को इसके लिए स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी, जो इस मामले में नहीं ली गई।
निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इमरजेंसी पावर्स लॉ के तहत लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ कानून के दायरे से बाहर थे। हालांकि यह फैसला ट्रंप को अन्य कानूनों के तहत ड्यूटी लगाने से नहीं रोकता, लेकिन उन प्रावधानों में सख्त सीमाएं हैं।
जस्टिस सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने फैसले से असहमति जताई, जबकि बहुमत ने दोहराया कि संविधान ने टैक्स लगाने की शक्ति एग्जीक्यूटिव ब्रांच को नहीं दी है।
इस फैसले को ट्रंप की आक्रामक विदेश और व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में भारत, चीन और मेक्सिको समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाकर ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी को नई दिशा दी थी। मामले से जुड़े आगे के अपडेट्स का इंतजार है।




