स्पंज आयरन प्लांटों का प्रदूषण बना जानलेवा, बरतोरी–बहेसर में बीमारियों का बढ़ता खतरा

तिल्दा नेवरा/रायपुर:
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के विकासखंड तिल्दा नेवरा के समीप स्थित औद्योगिक क्षेत्र—बरतोरी और बहेसर—इन दिनों गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रहा है। क्षेत्र में संचालित स्पंज आयरन और स्टील प्लांटों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषित कण आसपास के गांवों में लगातार 24 घंटे फैल रहे हैं, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्योगों में बाहरी राज्यों के लोगों को रोजगार तो दिया जा रहा है, लेकिन बदले में क्षेत्रवासियों को “काला ज़हर” झेलना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में दमा, श्वास संबंधी रोग, टीबी, चर्म रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सांस लेने में तकलीफ, दूषित खाद्यान्न और कृषि भूमि की गुणवत्ता में गिरावट भी बड़ी चिंता का विषय बन गई है। कई किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन अब बंजर होती जा रही है और खेतों में फसल के बजाय धात्विक अवशेष दिखाई दे रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पर्यावरण विभाग के अधिकारियों और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच से लेकर जनपद और जिला पंचायत प्रतिनिधियों तक, सभी इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। लोगों का मानना है कि यह चुप्पी निजी स्वार्थों के कारण हो सकती है, जिससे आम जनता की समस्याएं अनदेखी हो रही हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र जो कभी समृद्ध और स्वस्थ माना जाता था, जल्द ही गंभीर स्वास्थ्य संकट और पर्यावरणीय आपदा का केंद्र बन सकता है। लोगों को अपनी पैतृक जमीन और संपत्ति छोड़ने तक की नौबत आ सकती है।
इस समाचार के माध्यम से क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई करें, ताकि क्षेत्र को इस बढ़ते प्रदूषण संकट से बचाया जा सके।




