नया रायपुर। CG NEWS: महिला एवं बाल विकास विभाग, संचालनालय नया रायपुर द्वारा पिछले एक वर्ष के भीतर राज्य एवं जिला स्तर पर विभिन्न पदों के लिए जारी किए गए कई विज्ञापनों के तहत की गई भर्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी एवं सूत्रों के अनुसार, बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी स्तर के अनेक पदों पर नियुक्तियां नियमों को दरकिनार कर की गई हैं।
सूत्रों का दावा है कि जिला स्तर पर की गई अधिकांश नियुक्तियों में आर्थिक लेन–देन हुआ है। जिन पदों पर बाल संरक्षण एवं बाल संरक्षण प्रबंधन के क्षेत्र में अनिवार्य अनुभव की शर्त रखी गई थी, वहां नियुक्त अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र उनके रिश्तेदारों अथवा परिचितों द्वारा जारी किए गए बताए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2010 से लगातार बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे अनुभवी कर्मियों को भी इन नियुक्त व्यक्तियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सीमित अनुभव वाले अभ्यर्थियों को उच्च पद
जिला बाल संरक्षण अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति की गई, जिनका बाल संरक्षण क्षेत्र में वास्तविक अनुभव संदिग्ध बताया जा रहा है। कई नियुक्त संविदा अधिकारियों को राज्य स्तर के बाल संरक्षण तंत्र और संगठनों द्वारा भी नहीं पहचाना जा रहा, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
शैक्षणिक योग्यता पर भी संदेह
भर्ती नियमों के अनुसार समाज कार्य, समाजशास्त्र अथवा मनोविज्ञान जैसी विषयों में मान्य शैक्षणिक योग्यता आवश्यक थी, परंतु आरोप है कि चयनित कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र राज्य के बाहर के मुक्त विश्वविद्यालयों या छत्तीसगढ़ के ऐसे विश्वविद्यालयों से हैं, जिनके नाम पर पहले भी फर्जी अंकसूची संबंधी शिकायतें आती रही हैं।
एक मामले में तो चयनित अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा वर्ष 2016 से 2020 तक पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया था।
चाइल्ड हेल्पलाइन भर्ती पर भी सवाल
हाल ही में राज्य स्तर की चाइल्ड हेल्पलाइन के लिए की गई भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। राज्य की चाइल्ड हेल्पलाइन में एडमिनिस्ट्रेटर पद पर नियुक्त अभ्यर्थी को लेकर विभाग को कई शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव एवं राज्य बाल संरक्षण समिति की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
आरटीआई में भी सामने आई जानकारी
शिकायतकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित विश्वविद्यालय एवं जिला राजनांदगांव से जानकारी मांगी गई। विश्वविद्यालय चयनित अभ्यर्थी के प्रवेश एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने में असफल रहा, जिसके बाद प्रथम अपील दायर की गई है। वहीं जिला राजनांदगांव से प्राप्त जानकारी में यह स्वीकार किया गया कि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
फर्जी दस्तावेजों के बावजूद कार्रवाई नहीं
शिकायतकर्ता द्वारा फर्जी व कूट रचित प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराए जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की विभागीय जांच या कार्रवाई नहीं की गई है। यह पूरा मामला राज्य स्तर पर एक बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है।
अब देखना यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग इन गंभीर आरोपों पर कब तक चुप्पी तोड़ता है और क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है या नहीं।




