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MOTHER’S DAY SPECIAL

कोख भरी, लेकिन गोद रह गई खाली… उन मांओं की कहानी जिन्होंने किसी और के घर में जलाई खुशियों की लौ

 

9 महीने तक कोख में पालकर जन्म दिया, लेकिन अपनी गोद में नहीं रख पाईं बच्चा… मदर्स डे पर सेरोगेट मांओं के त्याग, दर्द और ममता की भावुक कहानी

मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास माना जाता है। एक महिला जब अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की पहली हलचल महसूस करती है, तो उसके साथ एक अनकहा रिश्ता बन जाता है। लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं, जो 9 महीने तक बच्चे को अपनी कोख में पालती हैं, उसके हर एहसास को जीती हैं, मगर जन्म के बाद उसे अपनी गोद में नहीं रख पातीं। मदर्स डे के मौके पर आज बात उन सेरोगेट मांओं की, जिन्होंने किसी और के घर में खुशियों की किलकारी तो पहुंचाई, लेकिन खुद के हिस्से में छोड़ दीं सिर्फ यादें और एक अधूरा एहसास।

सेरोगेट मदर बनना केवल एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनाओं, त्याग और मानसिक संघर्ष से भरा सफर होता है। कई महिलाएं आर्थिक मजबूरियों, परिवार की जरूरतों और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यह रास्ता चुनती हैं। वे 9 महीने तक बच्चे को अपने खून, सांसों और भावनाओं से सींचती हैं, लेकिन जन्म के तुरंत बाद उसे उसके वास्तविक माता-पिता को सौंप देती हैं।

उसके बाद उनके मन में सिर्फ सवाल और कल्पनाएं रह जाती हैं—आज वह बच्चा कितना बड़ा हो गया होगा? कैसा दिखता होगा? क्या उसे कभी याद होगा कि उसे दुनिया में लाने वाली मां कौन थी?

फर्टिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि सेरोगेसी केवल बच्चे के जन्म तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह भरोसे और भावनाओं का एक गहरा रिश्ता भी बनाती है। डॉक्टरों के अनुसार इन महिलाओं को सिर्फ “किराये की कोख” समझना गलत है, क्योंकि गर्भ के दौरान वे भी बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ जाती हैं। कई मामलों में बच्चा सौंपने के बाद महिलाएं गहरे मानसिक खालीपन और अवसाद का सामना करती हैं।

एक सेरोगेट मदर सुनीता (बदला हुआ नाम) बताती हैं—

“जब रात को बच्चा पेट में हलचल करता है तो मैं उसे लोरी सुना लेती हूं, क्योंकि पता नहीं फिर कभी मौका मिले या नहीं। मुझे मालूम है कि यह बच्चा किसी और का सपना है, लेकिन उसे जन्म देने के लिए मेरा खून-पसीना भी लगा है।”

इतना कहते-कहते उनकी आंखें नम हो जाती हैं। उनकी यह बात बताती है कि मां का रिश्ता सिर्फ जन्म देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह भावनाओं से जुड़ा एक अनमोल बंधन है।

भारत में अब कमर्शियल सेरोगेसी पर रोक लग चुकी है। वर्तमान नियमों के तहत केवल परोपकार की भावना और तय कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही सेरोगेसी की अनुमति दी जाती है। बावजूद इसके, सेरोगेट मांओं का त्याग, धैर्य और साहस आज भी समाज के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

मदर्स डे पर उन सभी मांओं को सलाम, जिन्होंने अपनी गोद खाली रखकर किसी और की दुनिया खुशियों से भर दी। कुछ रिश्ते नाम से नहीं, त्याग और ममता से पहचाने जाते हैं… और सेरोगेट मां इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

 

Mr. Prakash Joshi

प्रकाश जोशी पिछले 6 सालों से RVKD News चला रहे हैं और इसी नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रहे हैं। इसके माध्यम से लगातार जनता की समस्याएँ प्रशासन तक पहुँचा रहे हैं और शासन की योजनाएँ जनता तक पहुँचा रहे हैं। 📍 तिल्दा-नेवरा, रायपुर (छत्तीसगढ़) 📞 मोबाइल: 8770564196

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