
तिल्दा-नेवरा।
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता वेदराम मनहरे को राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार निगम, मंडल, बोर्ड एवं आयोग के कुल 15 पदाधिकारियों को राज्य मंत्री तथा 3 पदाधिकारियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
वेदराम मनहरे को राज्य मंत्री का दर्जा मिलने की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। समर्थकों ने इसे उनके राजनीतिक कद और संगठन में सक्रिय भूमिका की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
तीन विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव
वेदराम मनहरे का राजनीतिक प्रभाव आरंग, कसडोल (पलारी) और धरसींवा विधानसभा क्षेत्रों में माना जाता है। इन क्षेत्रों में सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर उनकी सक्रियता लंबे समय से देखी जाती रही है। यही वजह है कि राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद उनके समर्थकों के बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
क्या विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से?
राज्य सरकार द्वारा विभिन्न निगम-मंडल, बोर्ड और आयोग के पदाधिकारियों को मंत्री दर्जा दिए जाने के फैसले को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कवायद के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से वेदराम मनहरे को किसी सीट से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन उनके समर्थकों के बीच यह चर्चा जरूर शुरू हो गई है कि उन्हें आरंग, कसडोल या धरसींवा में से किसी एक विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का संभावित उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
समर्थकों में बढ़ी उम्मीदें
राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद वेदराम मनहरे के समर्थकों में आगामी राजनीतिक भूमिका को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब देखना होगा कि आने वाले समय में भाजपा संगठन उन्हें किस जिम्मेदारी में आगे बढ़ाता है और विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति में उनकी क्या भूमिका रहती है।
फिलहाल इतना तय है कि वेदराम मनहरे को मिला राज्य मंत्री का दर्जा उनके राजनीतिक प्रभाव और समर्थक वर्ग के लिए उत्साह बढ़ाने वाला फैसला माना जा रहा है।




