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ई-चालान के बकाए पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जुर्माना नहीं चुकाया तो वाहन सेवाएं होंगी बंद, देखिए कोर्ट के अहम निर्देश

ई-चालान नहीं भरा तो रुकेंगी वाहन की ऑनलाइन सेवाएं, सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली। Pending E Challan: देश में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि केवल ई-चालान काटना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बकाया जुर्माने की वसूली और नियमों का प्रभावी पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने लंबित ई-चालान वाले वाहनों की कई ऑनलाइन सेवाएं रोकने और नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167A के तहत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व्यवस्था लागू करने को कहा है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से तैयार SOP के मुताबिक ई-एनफोर्समेंट साइट्स को भी अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने कहा कि जिन वाहनों पर ट्रैफिक जुर्माने की राशि लंबित है, उनके लिए परिवहन पोर्टल पर उपलब्ध कुछ ऑनलाइन सेवाओं को रोका जा सकता है। इनमें वाहन का रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना, डुप्लीकेट RC लेना, मालिक का पता बदलना और वाहन का स्वामित्व ट्रांसफर जैसी सेवाएं शामिल हैं। बकाया जुर्माना पूरी तरह जमा होने तक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करने और वाहन को पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने का भी निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित नियम 21(25) का भी उल्लेख किया। इसके तहत 1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली एक साल की अवधि में पांच या उससे अधिक अपराध या ट्रैफिक उल्लंघन करने वाले लाइसेंसधारक के कृत्य को सार्वजनिक खतरे के रूप में माना गया है। कोर्ट ने ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

इसके अलावा वाहनों की रैंडम जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जांच के दौरान यदि किसी वाहन पर ई-चालान का भुगतान लंबित पाया जाता है, तो नियमानुसार वाहन को जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी ई-चालानों से जुड़ी करीब 49,194.05 करोड़ रुपये की राशि अभी वसूल की जानी बाकी है। वहीं करीब 26,175.05 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में चालान जारी करने के बजाय उनकी वसूली और ट्रैफिक नियमों के वास्तविक पालन पर भी ध्यान देना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के बीच मथुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि इस मार्ग से कर्मचारी, वकील, मुकदमेबाज, बच्चे और परिवार बड़ी संख्या में गुजरते हैं, इसलिए सड़क पार करने के दौरान उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए।

अदालत के मुताबिक वहां पैदल यात्रियों के लिए रेड लाइट लगाई गई है, लेकिन वह कई बार ठीक से काम नहीं करती। कोर्ट ने दो स्थानों पर सिंक्रोनाइज्ड ट्रैफिक सिग्नल, रंबल स्ट्रिप और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसे उपायों पर विचार करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 23/24 सितंबर 2026 की रात यमुना एक्सप्रेसवे के पास जेवर में डबल-डेकर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले का भी संज्ञान लिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जवाब मांगा है।

पीठ ने चालक और बस के पंजीकृत मालिक के खिलाफ हुई कार्रवाई, गिरफ्तारी तथा वाहन को सड़क पर चलाने से पहले सुरक्षा मानकों और जरूरी नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी हलफनामे के माध्यम से देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी।

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