गोरा-गौरी विसर्जन में उमड़ा आस्था का सैलाब, तिल्दा-नेवरा में पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ आयोजन
तिल्दा-नेवरा।
दीपावली के बाद मनाया जाने वाला पारंपरिक गोरा-गौरी विसर्जन पर्व बुधवार को नगर में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही नगर की गलियों और मोहल्लों में महिलाओं की टोलियां गीत-संगीत के साथ गौरा-गौरी की पूजा-अर्चना करती नजर आईं।

पारंपरिक श्रृंगार और पूजा-अर्चना
रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाओं ने मिट्टी से निर्मित गोरा-गौरी प्रतिमाओं का श्रृंगार किया। परिवार की सुख-समृद्धि और नवविवाहित जोड़ों के मंगलमय जीवन की कामना के साथ महिलाओं ने “गौरा-गौरी मिलन” की रस्म निभाई। पूजा के बाद पारंपरिक गीत और नृत्य से माहौल भक्तिमय हो गया।

तालाबों में हुआ विसर्जन
दोपहर बाद श्रद्धालु समूहों ने विसर्जन यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान पारंपरिक गीत “गोरा-गौरी जा रे गंगा, और बाजे गाजे ढोल नगाड़ों से ” गूंजते रहे। मुख्य विसर्जन स्थल तिल्दा तालाब और नेवरा तालाब में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

प्रशासन रहा मुस्तैद
नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की टीमों ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए। वहीं स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने प्रसाद वितरण और पेयजल की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं की सेवा की।
लोक परंपरा का प्रतीक
इस मौके पर नगर के वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि — “गोरा-गौरी पर्व हमारी लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व परिवार और समाज में प्रेम, एकता और समृद्धि का संदेश देता है।”
भक्ति, परंपरा और लोक संस्कृति के संगम के साथ तिल्दा-नेवरा में गोरा-गौरी विसर्जन का समापन हुआ।





