ट्रेड डील का विरोध, चार नए लेबर कोड की वापसी की मांग… आखिर आज किसानों और ट्रेड यूनियनों ने क्यों बुलाया भारत बंद?
सैकड़ों जिलों में असर की संभावना
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने नए लेबर कोड, निजीकरण, भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और कई प्रस्तावित विधेयकों के विरोध में आज भारत बंद का आह्वान किया है, जिसका असर देशभर के सैकड़ों जिलों में देखने को मिल सकता है।
संगठनों का आरोप है कि 2025 में लागू चार नए लेबर कोड मजदूरों की नौकरी सुरक्षा, यूनियन गतिविधियों और हड़ताल के अधिकार को कमजोर करते हैं तथा कंपनियों को छंटनी और नियुक्ति में अधिक छूट देते हैं, जिससे श्रमिक हित प्रभावित होंगे।
यूनियनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी, आंगनबाड़ी-आशा जैसे स्कीम वर्करों को वैधानिक दर्जा और बेहतर सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई है।
किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इससे विदेशी कृषि उत्पाद सस्ते दामों पर भारत आएंगे और घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ेगा।
इसके अलावा बिजली संशोधन विधेयक 2025, ड्राफ्ट सीड बिल, SHANTI Act और VB-G RAM G Act 2025 का भी विरोध किया जा रहा है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से रोजगार अस्थिर होगा और सामाजिक सुरक्षा कमजोर पड़ेगी।
बंद के कारण कई राज्यों में परिवहन सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हो सकती हैं, बस और ट्रक यूनियनों के समर्थन से यातायात बाधित होने की आशंका है। बैंकिंग सेवाओं में काउंटर कार्य धीमा रह सकता है, हालांकि ऑनलाइन लेन-देन और एटीएम सामान्य रूप से जारी रहेंगे।
कुछ जगहों पर बाजार और मंडियां बंद रह सकती हैं तथा सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना है। सुरक्षा कारणों से कुछ जिलों में स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित की जा सकती है। वहीं एंबुलेंस, अस्पताल, दमकल सेवा, हवाई यात्रा और डिजिटल बैंकिंग जैसी आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की जानकारी दी गई है।




