मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि अलग-अलग समय पर कई फिल्में एक ही नाम से बनाई जाती हैं। कहानी, कलाकार और निर्देशक बदल जाते हैं, लेकिन फिल्म का टाइटल वही रहता है। बॉलीवुड और अन्य फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जहां एक ही नाम से कई फिल्में बनीं और रिलीज भी हुईं। यह संयोग कई बार दर्शकों के लिए दिलचस्प भी बन जाता है और कभी-कभी भ्रम भी पैदा कर देता है।
सबसे पहले बात करते हैं “कर्ज” (Karz) की। साल 1980 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऋषि कपूर और टीना मुनीम नजर आए थे। यह फिल्म अपने संगीत और पुनर्जन्म की कहानी के कारण काफी लोकप्रिय हुई थी। इसके कई साल बाद 2008 में इसी नाम से एक और फिल्म बनी, जिसमें हिमेश रेशमिया और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिका में थे। हालांकि दूसरी फिल्म को उतनी सफलता नहीं मिल सकी।
इसी तरह “देवदास” नाम से भी कई फिल्में बन चुकी हैं। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास पर आधारित इस कहानी पर 1935, 1955 और 2002 में बड़ी फिल्में बनीं। 1955 में दिलीप कुमार की देवदास को क्लासिक माना जाता है, जबकि 2002 में संजय लीला भंसाली की फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित नजर आए थे।
“अग्निपथ” भी ऐसा ही एक उदाहरण है। 1990 में अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ ने बड़ी पहचान बनाई थी। इसके बाद 2012 में इसी नाम से ऋतिक रोशन की फिल्म रिलीज हुई, जो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।
“डॉन” नाम की फिल्म भी दो अलग-अलग दौर में बनी। 1978 में अमिताभ बच्चन की डॉन सुपरहिट रही थी। इसके बाद 2006 में शाहरुख खान के साथ फरहान अख्तर ने इसी नाम से नई फिल्म बनाई, जिसने नए अंदाज में दर्शकों को आकर्षित किया।
इसके अलावा “हिम्मतवाला” नाम से भी दो फिल्में बनीं। 1983 में जितेंद्र और श्रीदेवी की फिल्म हिम्मतवाला बेहद सफल रही थी। बाद में 2013 में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया के साथ इसी नाम से फिल्म बनाई गई, हालांकि यह फिल्म दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकी।
“जंजीर” नाम भी बॉलीवुड में दो बार चर्चा में आया। 1973 में अमिताभ बच्चन की जंजीर ने उन्हें “एंग्री यंग मैन” की पहचान दिलाई थी। इसके कई दशक बाद 2013 में राम चरण और प्रियंका चोपड़ा के साथ इसी नाम से फिल्म बनाई गई।
“कुली नंबर 1” भी ऐसा ही टाइटल है। 1995 में गोविंदा और करिश्मा कपूर की यह फिल्म सुपरहिट रही थी। 2020 में इसी नाम से वरुण धवन और सारा अली खान के साथ इसका नया वर्जन बनाया गया।
इसके अलावा “शोले”, “हीरो”, “दिलवाले” जैसे कई नाम ऐसे हैं जिन्हें अलग-अलग समय में फिल्मों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया गया। फिल्म निर्माताओं का मानना है कि किसी लोकप्रिय या प्रभावशाली नाम को दोबारा इस्तेमाल करने से दर्शकों में उत्सुकता बढ़ती है और फिल्म को शुरुआती पहचान मिलती है।
हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि पुरानी फिल्म की लोकप्रियता के कारण नई फिल्म की तुलना उससे होने लगती है। अगर नई फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद बॉलीवुड में एक ही नाम से फिल्म बनाने का ट्रेंड लगातार चलता रहा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो सिनेमा की दुनिया में एक ही नाम से बनी फिल्मों का यह सिलसिला दर्शकों के लिए हमेशा दिलचस्प रहा है। अलग-अलग दौर के कलाकार, नई तकनीक और बदलती कहानियों के साथ वही नाम फिर से पर्दे पर आता है और दर्शकों को पुरानी यादों के साथ नया अनुभव भी देता है।





