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Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढहने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस

बिल्डिंग मालिक के खिलाफ लुकआउट नोटिस

Building Collapse: राजधानी दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। रविवार, 6 सितंबर को हुए इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। मौके पर राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उठाया। चीफ जस्टिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आज ही सुनवाई करने की बात कही है।

इधर, पुलिस ने हादसे के बाद बिल्डिंग के मालिक हरिओम बंसल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है। इससे पहले पुलिस ने संबंधित धाराओं में उसके खिलाफ मामला भी दर्ज किया था।

पुलिस को आशंका है कि आरोपी देश से बाहर भागने की कोशिश कर सकता है, इसलिए उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

पुलिस के मुताबिक हरिओम बंसल की गुरुग्राम में करीब 6-7 प्रॉपर्टी हैं और वहां भी वह पीजी अकोमोडेशन का कारोबार करता है।

पुलिस की टीम सोमवार से ही गुरुग्राम स्थित उसके ठिकानों पर पहुंचकर उसकी तलाश कर रही है। हालांकि अभी तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। जांच और बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे 12 लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन इनमें से 7 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

घटना के बाद से ही प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर मौजूद हैं। मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए राहत कार्य जारी है।

सत्य निकेतन हादसे को लेकर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जेंट मेंशन किया गया। वकील ने चीफ जस्टिस के समक्ष घटना की गंभीरता का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की।

हादसे में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और इमारत की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी। माना जा रहा है कि अदालत हादसे से जुड़े सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित पहलुओं पर भी संज्ञान ले सकती है।

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