Janmashtami 2026: अर्जुन को लगी प्यास तो कृष्ण ने चलाया सुदर्शन चक्र, आज भी मौजूद है वो रहस्यमयी कुआं
जन्माष्टमी पर बढ़ जाता है धार्मिक आकर्षण
Janmashtami 2026: देशभर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं। वहीं राजस्थान का जैसलमेर ऐसा शहर है, जहां कृष्ण भक्ति के साथ कई प्राचीन धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। यहां सोनार किले में मौजूद एक प्राचीन कुआं भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की एक दिलचस्प कथा से जुड़ा है। स्थानीय मान्यता है कि अर्जुन की प्यास बुझाने के लिए स्वयं श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से इस कुएं को खोदा था।
कृष्ण भक्ति में रंगा जैसलमेर
राजस्थान का जैसलमेर अपनी सुनहरी हवेलियों और ऐतिहासिक सोनार किले के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से भी इस शहर की अपनी खास पहचान है। यहां वैष्णव संप्रदाय के कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान कृष्ण की आराधना करते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर जैसलमेर का माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो जाता है। मंदिरों में भजन-कीर्तन, बधाई गीत और विशेष आरती के आयोजन होते हैं। शहर के मंदिर पैलेस स्थित श्री गिरधारी जी मंदिर में भी जन्मोत्सव की तैयारियां चल रही हैं। यह मंदिर पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय से जुड़ा हुआ है। जन्माष्टमी पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जैसलमेर में हैं कई प्राचीन कृष्ण मंदिर
जैसलमेर को यदुवंशी भाटी राजपूतों की ऐतिहासिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। शहर में एक दर्जन से अधिक कृष्ण मंदिर बताए जाते हैं। इनमें गिरधारी जी मंदिर, बांके बिहारी जी, मदन मोहन जी, श्रीनाथ जी, गोविंदसर, मेलाब और लक्ष्मीनाथ जी मंदिर प्रमुख हैं।
इन मंदिरों में सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है, लेकिन जन्माष्टमी के मौके पर यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। मंदिरों में सजावट के साथ भगवान कृष्ण के जन्म की झांकियां और विशेष धार्मिक आयोजन आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
सोनार किले में है जैसलू कुआं
जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में लक्ष्मीनाथ जी मंदिर के पास जैसलू कुआं स्थित है। यह कुआं अपनी प्राचीनता के साथ उससे जुड़ी धार्मिक कथा के कारण भी खास माना जाता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह कुआं हजारों वर्ष पुराना है और इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और उनके प्रिय मित्र अर्जुन से है। कहा जाता है कि एक समय श्रीकृष्ण और अर्जुन द्वारका की ओर जा रहे थे। यात्रा के दौरान दोनों त्रिकूट पहाड़ी पर रुके। इसी दौरान अर्जुन को तेज प्यास लगी।
आस-पास पानी का कोई स्रोत नहीं था। तब अर्जुन की प्यास बुझाने के लिए श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र चलाकर धरती में पानी का स्रोत बना दिया। मान्यता है कि इसी स्थान पर बाद में कुआं बना, जिसे आज जैसलू कुएं के नाम से जाना जाता है।
क्या आज भी कुएं में है पानी?
जैसलू कुएं को वर्तमान में बंद कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता आज भी कायम है कि कुएं के भीतर पानी मौजूद है। यही वजह है कि सोनार दुर्ग आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान खास आकर्षण रखता है।
इस कुएं से जुड़ी एक और मान्यता प्राचीन सरस्वती नदी से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब यहां पानी का स्रोत मिला, तो उसे सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह से जोड़ा गया। हालांकि, इन मान्यताओं का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अलग-अलग रूप में देखा जाता है और इन्हें स्थानीय परंपराओं के तौर पर भी समझा जाता है।
जन्माष्टमी पर बढ़ जाता है धार्मिक आकर्षण
जन्माष्टमी के मौके पर जब देशभर में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा होती है, तब जैसलमेर में मौजूद यह प्राचीन कुआं कृष्ण और अर्जुन से जुड़ी उस कथा की याद दिलाता है, जो सदियों से स्थानीय लोगों के बीच सुनाई जाती रही है।
सोनार किले की पीली पत्थर की दीवारों के बीच स्थित यह कुआं जैसलमेर की धार्मिक आस्था, लोककथाओं और ऐतिहासिक विरासत का अनोखा संगम है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के दौरान जैसलमेर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जैसलू कुआं भी देखने और इसके पीछे की कहानी जानने का एक खास केंद्र बन जाता है।




