AI से बना वीडियो डाला तो फंस सकते हैं आप, सरकार ने कसा शिकंजा, 5 पॉइंट्स में समझें नियम
डीपफेक और भ्रामक कंटेंट पर लगेगा ब्रेक, प्लेटफॉर्म और यूजर दोनों जिम्मेदार
सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे AI जनरेटेड वीडियो, फोटो और ऑडियो से लोगों में बन रहे भ्रम और गलतफहमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब सख्त नियमों का ऐलान कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी AI से बने कंटेंट को बिना पहचान के पोस्ट नहीं किया जा सकेगा और सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट पर साफ और स्पष्ट लेबल दिखाना अनिवार्य होगा, ताकि यूजर यह समझ सके कि जो वीडियो या फोटो वह देख रहा है वह असली है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है।
सरकार के अनुसार, AI जनरेटेड किसी भी विजुअल कंटेंट के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में लेबलिंग जरूरी होगी, यही नियम ऑडियो और वीडियो क्लिप पर भी लागू रहेगा। इसके साथ ही अब प्लेटफॉर्म्स को हर यूजर से अपलोड के समय यह पूछना होगा कि जो कंटेंट डाला जा रहा है वह सिंथेटिक यानी AI से बना है या नहीं, और सिर्फ यूजर की बात पर भरोसा नहीं किया जाएगा बल्कि इसके लिए तकनीकी वेरिफिकेशन टूल्स का भी इस्तेमाल करना होगा।
नए नियमों में फर्जी और भ्रामक AI कंटेंट पर कार्रवाई का समय भी काफी कम कर दिया गया है। अगर किसी प्लेटफॉर्म को डीपफेक या गलत जानकारी फैलाने वाला AI कंटेंट मिलता है, तो उसे अब तीन घंटे के भीतर हटाना होगा, जबकि पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। खासतौर पर बच्चों से जुड़े गलत कंटेंट, बिना सहमति के बनाई गई निजी तस्वीरें या वीडियो, फर्जी दस्तावेज और हिंसा दिखाने वाले AI कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने साफ किया है कि नियमों का पालन न करने पर सोशल मीडिया कंपनियों को भी जिम्मेदार माना जाएगा और उनकी कानूनी सुरक्षा समाप्त की जा सकती है। आसान शब्दों में कहें तो अब इंटरनेट पर फैल रहे नकली वीडियो और फोटो पर ब्रेक लगाने की कोशिश तेज हो गई है और आने वाले समय में सोशल मीडिया पर दिखने वाले कंटेंट पर पहले से ज्यादा सख्त नजर रखी जाएगी।




