दुश्मनों को बेचा जा रहा है भारत का डेटा, अमित शाह की चेतावनी— अब साइबर फ्रॉड नेशनल सिक्योरिटी का मुद्दा
डिजिटल ठगी नहीं, देश की सुरक्षा पर सीधा खतरा, सरकार का बड़ा एक्शन प्लान
गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर अपराध पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब साइबर फ्रॉड सिर्फ आर्थिक नुकसान का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत का संवेदनशील डेटा दुश्मन ताकतों तक पहुंच रहा है, जिससे देश की डिजिटल व्यवस्था, सिस्टम और निर्णय लेने की क्षमता खतरे में पड़ सकती है। अमित शाह ने बताया कि सरकार और जांच एजेंसियों ने अब तक साइबर अपराधियों के हाथों से लगभग 8,000 करोड़ रुपये बचाए हैं, जो रियल-टाइम डिटेक्शन और फंड ट्रेसिंग की वजह से संभव हो पाया।
उन्होंने कहा कि आज बैंकिंग, टैक्स, हेल्थ, कम्युनिकेशन और नागरिकों के निजी रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हैं और अगर यह डेटा गलत हाथों में जाता है तो इसका असर सिर्फ व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे देश पर पड़ता है। इसी खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय और CBI के साथ मिलकर Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) साइबर अपराध के पूरे नेटवर्क को समझने और तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक साइबर अपराध अब पेशेवर नेटवर्क की तरह काम कर रहा है, जिसमें म्यूल अकाउंट्स, फर्जी सिम, कॉल फॉरवर्डिंग, फर्जी वेबसाइट और सोशल इंजीनियरिंग जैसे हथकंडों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में UPI से जुड़े 13.42 लाख से अधिक फ्रॉड केस दर्ज हुए, जिनमें करीब 1,087 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि 2024-25 में डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या 18,000 करोड़ से ज्यादा रही, इसी इकोसिस्टम में स्कैमर्स सक्रिय रहे। IIM अहमदाबाद की स्टडी भी बताती है कि आधे से ज्यादा मामलों में लोगों को 1 से 10 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है, यानी यह संकट सीधे आम आदमी की जमा पूंजी पर चोट कर रहा है।
गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि अब केवल शिकायत दर्ज कराना ही काफी नहीं होगा, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित समाधान, AI डिटेक्शन टूल्स, सेंट्रल साइबर क्राइम रजिस्ट्री और तेज कार्रवाई जरूरी है। सरकार आने वाले वर्षों में करीब 5,000 साइबर कमांडो तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, जो रियल-टाइम साइबर हमलों का जवाब दे सकें। सरकार का मानना है कि तकनीक के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता, आसान रिपोर्टिंग सिस्टम और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही से ही देश की डिजिटल और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है।




