Breaking News: मरकाबेड़ा ब्लास्ट में बड़ा खुलासा — IED नहीं, 75 किलो गनपाउडर में धमाका; जवान शहीद, कल अंतिम सलामी
ब्लास्ट में बड़ा खुलासा, 75 किलो गनपाउडर से धमाका; 3 जवान शहीद, कल अंतिम सलामी
कांकेर-नारायणपुर। CG NEWS: कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र के मरकाबेड़ा में हुए भीषण ब्लास्ट मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर बदल दी है। शुरुआती तौर पर इसे आईईडी विस्फोट माना जा रहा था, लेकिन जांच में सामने आया है कि यह धमाका नक्सलियों द्वारा पहले से छुपाकर रखे गए करीब 75 किलो गनपाउडर में हुआ, जिसमें पोटैशियम नाइट्रेट और बेरियम नाइट्रेट जैसे खतरनाक रसायन शामिल थे। यह विस्फोट उस समय हुआ जब 2 मई 2026 को थाना छोटेबेठिया क्षेत्र से डी-माइनिंग, एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन के लिए निकली DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की टीम इन विस्फोटकों को बाहर निकालकर निष्क्रिय करने की प्रक्रिया में जुटी हुई थी।
पुलिस के अनुसार नक्सलियों ने इस विस्फोटक सामग्री को बेहद चालाकी से 5 अलग-अलग बोरों में छुपाकर रखा था, ताकि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके। जब जवान इन बोरों को निकालकर सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की तैयारी कर रहे थे, तभी तेज गर्मी और रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण अचानक जोरदार धमाका हो गया। इस अप्रत्याशित विस्फोट की चपेट में आकर इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढ़पाले गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार जारी है।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से मिली सूचनाओं और अन्य खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस और सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत सैकड़ों आईईडी और विस्फोटक बरामद कर निष्क्रिय किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि जिस समय जवान विस्फोटक को निष्क्रिय कर रहे थे, उसी दौरान यह आकस्मिक विस्फोट हो गया।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और मामले की गहन जांच जारी है। इस बीच शहीद जवानों के पार्थिव शरीरों को सम्मानपूर्वक उनके गृह जिलों में लाया गया है। शहीद परमानंद कोर्राम का पार्थिव शरीर कांकेर मेडिकल कॉलेज में रखा गया है, जहां से उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं अन्य तीन शहीद जवानों के पार्थिव शरीर नारायणपुर में रखे गए हैं। सभी शहीदों को कल पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी जाएगी, जिसमें पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन के दौरान मौजूद खतरों को उजागर कर दिया है। छुपाकर रखे गए विस्फोटक, रासायनिक पदार्थ और अत्यधिक संवेदनशील सामग्री सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। बावजूद इसके, सुरक्षा बल लगातार अपने अभियान जारी रखे हुए हैं और क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मरकाबेड़ा का यह हादसा न केवल एक त्रासदी है, बल्कि यह उन जवानों के साहस और बलिदान की भी याद दिलाता है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं।




