
तिल्दा-नेवरा, रायपुर से रिपोर्ट —
जहां एक ओर पूरा देश दीपों का पर्व दीपावली उल्लास से मना रहा है, वहीं दूसरी ओर अल्ट्राटेक सीमेंट वर्क्स, बैकुंठ (तिल्दा-नेवरा) के मजदूर अब भी अपने परिवारों से दूर अंधेरे में रोशनी की आस लिए बैठे हैं। हड़ताल का आज 15वां दिन है, और प्रबंधन की खामोशी ने मजदूरों के सब्र की सीमा तोड़ दी है।

दीपावली पर भी धरने पर बैठे मजदूर — “यह दीये हमारी लड़ाई की रोशनी हैं”
कारखाने में जारी जबरन तालाबंदी और प्रबंधन की चुप्पी ने मजदूरों को गहराई तक झकझोर दिया है। दीपावली की रात को भी मजदूर मुख्य गेट पर पूजा-अर्चना और आरती कर रहे हैं, दीपक जलाकर भगवान से न्याय की प्रार्थना कर रहे हैं।
धरना स्थल पर बच्चों ने रंगोली बनाई, श्रमिक परिवारों ने वही भोजन पकाया और इस दीपोत्सव को संघर्ष और आशा के प्रतीक के रूप में मनाया।

किसान नेता राजू शर्मा का साथ — “जरूरत पड़ी तो किसानों की भीड़ उतरेगी सड़कों पर”
धरना स्थल पर पहुंचे किसान नेता राजू शर्मा ने मिठाई बांटकर मजदूरों को हौसला दिया। उन्होंने कहा —
“यह संघर्ष सिर्फ मजदूरों का नहीं, हर उस व्यक्ति का है जो मेहनत से अपना जीवन चला रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो किसान भी मजदूरों के साथ सड़कों पर उतरेंगे।”
श्रमिक यूनियन के संरक्षक शंकर सिंह निर्मलकर का बड़ा ऐलान
शंकर सिंह निर्मलकर ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा —
“अगर प्रबंधन ने जल्द तालाबंदी नहीं हटाई और श्रमिकों को काम पर वापस नहीं लिया, तो हम पूरे छत्तीसगढ़ में अल्ट्राटेक सीमेंट के अन्य प्लांटों को भी बंद कराने का अभियान छेड़ेंगे।”
उन्होंने बताया कि प्रबंधन मंत्री, विधायक और सांसदों की बात भी अनसुनी कर रहा है, जिससे मजदूरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अब आंदोलन में पहुँचीं पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा — बोलीं, “आपकी मांगे जायज हैं, हम दिल्ली तक जाएंगे”
आज शाम करीब 4 बजे, संघर्षरत मजदूरों का हालचाल जानने पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा खुद अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स पहुंचीं।
वहां उन्होंने श्रमिकों की समस्याएं विस्तार से सुनीं और मौके पर मौजूद अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया।
छाया वर्मा ने कहा —
“मामले को बैठकर सुलझाना ही सही रास्ता है। मैं स्वयं प्रबंधन से बात करूंगी। जैसे ही उनकी ओर से प्रतिक्रिया आएगी, यूनियन पदाधिकारियों को बुलाकर वार्ता की जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि मजदूरों की मांगे पूरी तरह जायज और उचित हैं, और कहा —
“आप हिम्मत न हारें। हम आपकी आवाज़ दिल्ली तक पहुंचाएंगे और समाधान तक साथ रहेंगे।”
इस दौरान श्रमिकों ने तालियों और नारों से उनका स्वागत किया। उनकी उपस्थिति ने आंदोलन को नई ऊर्जा और उम्मीद दी है।
प्रबंधन की चुप्पी बन सकती है विस्फोटक स्थिति
प्रबंधन द्वारा अब तक बातचीत का कोई स्पष्ट संकेत न देना आंदोलन को उग्र रूप देने की ओर धकेल रहा है। धरना स्थल पर हर दिन सुबह-शाम रामायण पाठ और आरती हो रही है — आंदोलन अब संघर्ष और आस्था दोनों का प्रतीक बन चुका है।
“जब हर घर में दीपावली की रोशनी है, तब बैकुंठ के मजदूरों के घरों में अंधेरा क्यों?”

ये मजदूर अब केवल वेतन नहीं, सम्मान और न्याय की रोशनी मांग रहे हैं।
शासन और प्रबंधन की उदासीनता अगर ऐसे ही जारी रही, तो यह हड़ताल अब प्रदेश-
स्तर पर बड़ा रूप ले सकती है — जिसकी गूंज रायपुर से दिल्ली तक सुनाई देगी।




