Lease vs Rent Agreement: एक साइन से पहले जान लें फर्क, वरना पछताना पड़ेगा
एक गलती और बढ़ सकती है परेशानी, सही एग्रीमेंट चुनना क्यों है जरूरी?
Lease vs Rent Agreement: लीज एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट को लोग अक्सर एक जैसा मान लेते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है और बिना समझे साइन करने पर आगे चलकर कानूनी व आर्थिक दिक्कतें आ सकती हैं; लीज एग्रीमेंट आमतौर पर लंबी अवधि (12 महीने, 3 साल या उससे ज्यादा) के लिए होता है,
इसमें किराया और शर्तें तय रहती हैं, 12 महीने से ज्यादा होने पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है जिससे कानूनी मजबूती मिलती है लेकिन स्टांप व रजिस्ट्रेशन खर्च ज्यादा होता है और बीच में खत्म करना कठिन व जुर्माने वाला हो सकता है, जबकि रेंट एग्रीमेंट छोटी अवधि (अक्सर 11 महीने) का होता है, इसे रिन्यू करना आसान होता है,
हर रिन्यूअल पर शर्तें/किराया बदला जा सकता है, आमतौर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं होता इसलिए यह सस्ता और फ्लेक्सिबल है और 30 दिन का नोटिस देकर खत्म किया जा सकता है; खर्च की प्लानिंग में लीज ज्यादा स्थिरता देती है तो रेंट में अनिश्चितता रहती है—इसलिए लंबे समय के लिए रहने वालों के लिए लीज और बदलते प्लान वालों के लिए रेंट एग्रीमेंट बेहतर माना जाता है, बस साइन करने से पहले शर्तें ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




