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World Mystery: पारे की नदियां, श्रापित तहखाने और मौत के दरवाजे… दुनिया के वो 7 रहस्य जिनके सामने आज भी घुटने टेक देता है विज्ञान

पारे की नदियों से लेकर श्रापित तहखानों तक, दुनिया के इन रहस्यमयी दरवाजों को खोलने से आज भी डरती हैं सरकारें और वैज्ञानिक।

नई दिल्ली। World Mystery: इंसान ने चांद पर कदम रख दिया, मंगल ग्रह तक यान भेज दिए, समुद्र की हजारों फीट गहराई माप ली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक विकसित कर ली, लेकिन दुनिया में आज भी कुछ ऐसे रहस्य मौजूद हैं जिनके सामने आधुनिक विज्ञान और बड़ी-बड़ी महाशक्तियां भी बेबस नजर आती हैं। धरती पर कई ऐसे गुप्त दरवाजे, तहखाने, पिरामिड और तिजोरियां हैं जिन्हें आज तक पूरी तरह नहीं खोला जा सका। कहीं जहरीली पारे की नदियां बहती हैं, कहीं हजारों साल पुराने यांत्रिक जाल मौत बनकर छिपे हैं, तो कहीं धार्मिक आस्था और प्राचीन इंजीनियरिंग ने वैज्ञानिकों को रोक रखा है। यही वजह है कि इन रहस्यमयी जगहों को लेकर आज भी दुनिया में डर, रोमांच और जिज्ञासा बनी हुई है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर का रहस्यमयी ‘वोल्ट बी’

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भारत के केरल स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का नाम दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में लिया जाता है। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मंदिर की कई गुप्त तिजोरियां खोली गईं, जिनसे सोना, हीरे-जवाहरात और प्राचीन खजाने का अंबार मिला। लेकिन असली रहस्य तब शुरू हुआ जब टीम ‘वोल्ट बी’ नामक सातवें दरवाजे तक पहुंची। यह दरवाजा आज भी बंद है और इसे खोलने की अनुमति नहीं दी गई। खास बात यह है कि इस दरवाजे पर न तो कोई ताला है और न ही कोई हैंडल। मान्यता है कि इसे प्राचीन काल में “नाग बंधम” मंत्रों से सील किया गया था और इसे जबरन खोलना विनाश को न्योता देने जैसा होगा। स्थानीय पुरोहितों और त्रावणकोर राजपरिवार का दावा है कि इसे केवल विशेष “गरुड़ मंत्र” से ही खोला जा सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह तहखाना सदियों से एयर-टाइट बंद है, जिसके कारण अंदर जहरीली गैसों का भारी जमाव हो सकता है। बिना आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम के अंदर जाना जानलेवा साबित हो सकता है। यही कारण है कि सरकार और अदालत भी इस संवेदनशील मामले में आगे बढ़ने से बचती रही हैं।

चीन के सम्राट की कब्र में बहती हैं पारे की नदियां

चीन के पहले सम्राट चिन शिन हुआंग की कब्र दुनिया के सबसे खतरनाक रहस्यों में गिनी जाती है। 1974 में जब टेराकोटा आर्मी की खोज हुई तो पूरी दुनिया हैरान रह गई, लेकिन सम्राट की असली कब्र आज तक नहीं खोली गई। प्राचीन चीनी दस्तावेजों के अनुसार सम्राट ने अपनी कब्र के अंदर पारे की कृत्रिम नदियां और झीलें बनवाई थीं। इसके अलावा घुसपैठियों को मारने के लिए यांत्रिक तीर-कमान वाले जाल भी लगाए गए थे।

शुरुआत में वैज्ञानिकों ने इसे मिथक माना, लेकिन आधुनिक मिट्टी परीक्षण में कब्र के आसपास पारे का स्तर सामान्य से कई सौ गुना अधिक मिला। वैज्ञानिकों को डर है कि कब्र खोलते ही जहरीली पारे की गैस बाहर निकल सकती है, जो कुछ ही मिनटों में इंसान को मौत के मुंह में धकेल सकती है। इसके अलावा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर कब्र खोली गई तो अंदर मौजूद हजारों साल पुरानी कलाकृतियां हवा के संपर्क में आते ही नष्ट हो सकती हैं।

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गिजा पिरामिड के भीतर छिपे गुप्त दरवाजे

मिस्र का गिजा पिरामिड दुनिया के सबसे रहस्यमयी निर्माणों में गिना जाता है। पिरामिड के भीतर मौजूद “क्वींस चैंबर” में जाने वाली दो संकरी सुरंगों में जब वैज्ञानिकों ने रोबोटिक कैमरे भेजे, तो उन्हें पत्थर के ऐसे छोटे दरवाजे मिले जिनमें तांबे के हैंडल लगे हुए थे। वैज्ञानिकों ने ड्रिल से छोटा छेद कर कैमरा अंदर भेजा, लेकिन वहां भी एक और पत्थर का दरवाजा दिखाई दिया। आज तक यह पता नहीं चल पाया कि इन दरवाजों के पीछे क्या छिपा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन गुप्त रास्तों को जबरन तोड़ा गया तो पिरामिड की पूरी आंतरिक संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि आज की आधुनिक तकनीक भी इन रहस्यमयी रास्तों को पूरी तरह खोलने का जोखिम नहीं उठा पा रही।

‘ग्रेट स्फिंक्स’ के नीचे छिपा है गुप्त ज्ञान?

मिस्र की विशाल ‘ग्रेट स्फिंक्स’ मूर्ति को लेकर भी कई रहस्य जुड़े हैं। कुछ इतिहासकार दावा करते हैं कि इसके पंजों के नीचे “हॉल ऑफ रिकॉर्ड्स” नामक गुप्त कक्ष मौजूद है, जिसमें प्राचीन सभ्यताओं और खोए हुए द्वीप अटलांटिस का ज्ञान छिपा है। 1990 के दशक में ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार जांच में भूमिगत कक्षों के संकेत भी मिले थे।

हालांकि मिस्र सरकार ने यहां खुदाई पर पूरी तरह रोक लगा दी, क्योंकि स्फिंक्स चूना पत्थर से बनी बेहद संवेदनशील संरचना है। वैज्ञानिकों को डर है कि जरा सी गलती से हजारों साल पुरानी यह मूर्ति हमेशा के लिए ढह सकती है।

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बोलिविया का ‘सूर्य द्वार’ आज भी बना है पहेली

एंडीज पर्वतों की ऊंचाइयों पर स्थित ‘गेटवे ऑफ द सन’ यानी सूर्य द्वार भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। करीब 10 टन वजनी यह विशाल ढांचा एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया है। माना जाता है कि यह एक प्राचीन खगोलीय कैलेंडर था, जो ग्रहों और मौसम की सटीक गणना करता था।

विशेषज्ञ आज तक समझ नहीं पाए कि बिना आधुनिक मशीनों के इतनी ऊंचाई पर इतने भारी पत्थर को इतनी बारीकी से कैसे तराशा गया। संरचना बेहद नाजुक होने के कारण बोलिविया सरकार यहां ज्यादा खुदाई या प्रयोग की अनुमति नहीं देती।

मेक्सिको की सुरंग में मिला तरल पारा

मेक्सिको के तेओतिहुआकान पिरामिड के नीचे साल 2003 में एक गुप्त सुरंग मिली थी, जो करीब 1800 साल से बंद थी। रोबोटिक कैमरों की मदद से जब वैज्ञानिक अंदर पहुंचे, तो वहां तरल पारा फैला हुआ मिला। माना जाता है कि प्राचीन सभ्यता ने इसे पाताल लोक की प्रतीकात्मक नदी के रूप में इस्तेमाल किया था।

जहरीले वातावरण और सुरंग के ढहने के खतरे के कारण वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। आज भी उस सुरंग के अंतिम दरवाजे पूरी तरह नहीं खोले जा सके हैं।

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दुनिया की सबसे सुरक्षित तिजोरी: ‘डूम्सडे वॉल्ट’

इन प्राचीन रहस्यों के बीच आधुनिक दुनिया का सबसे रहस्यमयी और सुरक्षित दरवाजा नॉर्वे का ‘स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट’ माना जाता है। आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ के नीचे बनी इस तिजोरी में दुनिया भर की फसलों के करोड़ों बीज सुरक्षित रखे गए हैं। इसका मकसद परमाणु युद्ध, महामारी या वैश्विक आपदा की स्थिति में मानव सभ्यता को दोबारा शुरू करना है।

यह तिजोरी इंटरनेट से पूरी तरह अलग रखी गई है और यहां अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। इसे केवल वैश्विक आपातकाल की स्थिति में ही खोला जा सकता है। दुनिया का कोई भी शक्तिशाली देश या अरबपति व्यक्ति इसे अपनी मर्जी से नहीं खोल सकता।

विज्ञान क्यों नहीं खोल पा रहा ये रहस्य?

विशेषज्ञों के अनुसार इन जगहों को खोलने में सबसे बड़ा खतरा जहरीले रसायनों, कमजोर संरचनाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के नष्ट होने का है। कई जगहों पर धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि आधुनिक तकनीक होने के बावजूद सरकारें और वैज्ञानिक पूरी सावधानी बरत रहे हैं।

दुनिया के ये रहस्यमयी दरवाजे इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण हैं कि इंसान चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो जाए, इतिहास और प्रकृति के कुछ रहस्य आज भी उसकी पहुंच से बहुत दूर हैं।

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