
तिल्दा–नेवरा/रायपुर।
20 दिसंबर को शनिवार के दिन पड़ रही शनि अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिल रही है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा, पाठ और अभिषेक करने से जीवन के कष्ट, बाधाएं, शनि दोष, साढ़ेसाती व ढैय्या के प्रभाव कम होते हैं तथा भक्तों पर शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शनि अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर शनि देव की पूजा करते हैं। सरसों के तेल, काले तिल और जल से शनि देव का अभिषेक कर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा सीधे शनि देव को प्रसन्न करती है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार शनि अमावस्या पर दान का विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को काला तिल, उड़द दाल, कंबल, वस्त्र या भोजन का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में स्थिरता आती है। पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने को भी शुभ माना गया है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि 20 दिसंबर को की गई यह विशेष पूजा
➡️ आर्थिक परेशानियों को दूर करती है
➡️ नौकरी–व्यवसाय में आ रही बाधाओं को कम करती है
➡️ मानसिक तनाव से राहत दिलाती है
➡️ जीवन में सुख, शांति और न्याय प्रदान करती है
इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त शनि मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे और शनि देव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
शनि अमावस्या पर श्रद्धा, संयम और दान के साथ की गई पूजा निश्चित ही कष्टों का नाश कर शनि देव की विशेष कृपा दिलाती है।




